
बाली के किसानों के स्वामित्व वाले 4,000 हेक्टेयर चावल के खेत रहे चावल की खेती में शामिल बीमा एक अधिकारी ने बताया कि अक्टूबर 2015 से मार्च 2016 तक की रोपण अवधि के लिए यह कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
बाली प्रांतीय कृषि एवं खाद्य पदार्थ मामलों के कार्यालय की प्रमुख इदा बागुस विष्णुवर्धन ने रविवार को यहां कहा, "इस वर्ष हमारा पिछला लक्ष्य 11 हजार हेक्टेयर चावल के खेतों का था, लेकिन सीमित समय के कारण केवल 4,000 हेक्टेयर का ही बीमा किया जा सका है।"
उन्होंने कहा कि इस प्रकार, यदि चावल के खेतों का बीमा होने के बाद बाढ़ या कीटों के हमले के कारण फसल बर्बाद होती है, तो किसान को प्रति हेक्टेयर 6 मिलियन रुपये का दावा मिल सकता है।
इसके अलावा, किसानों को पूरा प्रीमियम नहीं देना चाहिए क्योंकि इसका 80 प्रतिशत राज्य के बजट से सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। प्रति हेक्टेयर प्रीमियम की राशि 180 हज़ार रुपये है, लेकिन 80 प्रतिशत (144 हज़ार रुपये प्रति हेक्टेयर) राज्य के बजट से वहन किया जाता है।
विष्णुवर्धन ने बताया, "इस प्रकार, संबंधित किसान को प्रत्येक रोपण सीजन में प्रति हेक्टेयर केवल 36 हजार रुपये का भुगतान करना पड़ता है।"